बिना कनेक्शन के ही आ रहा है बिजली का बिल,

Electricity bill

बिना विद्युत कनेक्शन दिये ही बिल दिये जाने और उपभोक्ता का मीटर गायब करने वाले कर्मचारी को सस्पेण्ड करने की मांग को लेकर जोधपुर विद्युत वितरण निगम की महाप्रबन्धक को एक ज्ञापन दिया गया है। ज्ञापन में लिखा है कि कस्बे के महेन्द्र पुत्र बजरंगलाल सोनी ने अपनी हनुमान कॉम्पलैक्स बाड़ी बास स्थित दुकान पर एनडीएस कनेक्शन के लिए आवेदन किया था। जिसकी अमानत राशि रसीद क्रमांक 1907 से 7500/ रूपये 5 जून 12 को जमा करवा दिये गये थे। जिसके बाद भी उपभोक्ता को आज दिन तक कनेक्शन नहीं दिया गया। जबकि निगम द्वारा उपभोक्ता को बिल नियमित भिजवाया जा रहा है। उपभोक्ता द्वारा निगम में लिखित शिकायत करने पर पता चला कि उसका विद्यूत कनेक्शन 13 जुलाई 2012 को कर दिया गया, जिसकी खाता संख्या 2409/340 है व मीटर संख्या 18255616 है। जबकि उपभोक्ता विगत एक साल से निगम के चक्कर लगा रहा है और जेईएन द्वारा कहा गया है कि आपका विद्यूत कनेक्शन जल्दी ही कर दिया जायेगा। इसके विपरित दस्तावेजों एवं निगम द्वारा भेजे जा रहे बिल के अनुसार उपभोक्ता का कनेक्शन हो चूका है, तो कनेक्शन कहां पर हुआ है, जिसके बारे में जेईएन कार्यालय से आज तक कोई सूचना उपभोक्ता को नहीं मिली है।

कहां से आया मीटर
अपने विद्यूत कनेक्शन को लेकर उपभोक्ता द्वारा बार-बार चक्कर लगाने पर निगम का कर्मचारी प्रभूराम अचानक एक मीटर लगा कर आ गया, जिसका नम्बर 19901082 दर्ज है, जो जांच करने पर किसी भी उपभोक्ता के नाम आवंटित नहीं है। जब मीटर किसी उपभोक्ता के नाम आवंटित ही नहीं है तो प्रभूराम मीटर कहां से लाया? प्रभूराम ने मीटर तो लगा दिया, लेकिन कनेक्शन नहीं किया।

शिकायत मत करना, नौकरी चली जायेगी
ज्ञापन में बताया गया है कि इस दौरान प्रभूराम ने उपभोक्ता के घर जाकर कहा कि मुझ से भूल हो गई, मेरी शिकायत मत करना, मेरी नौकरी चली जायेगी।

बकाया जमा कराओ नहीं तो काट दिया जायेगा कनेक्शन
जोधपुर विद्यूत वितरण निगम द्वारा उपभोक्ता को 7-8 हजार रूपये बकाया का बिल भेज कर, बकाया राशि जमा नहीं करवाने पर कनेक्शन काटने की चेतावनी दी है। परन्तु जब कनेक्शन ही नहीं तो किस कनेक्शन का बिल उपभोक्ता भरे और उपभोक्ता बिल जमा नहीं करवाये तो निगम द्वारा कौनसा कनेक्शन काटा जायेगा?

निगम को लगा चूना
मीटर संख्या 18255616 किस स्थान पर लगा है और इसके द्वारा विद्यूत का उपभोग कौन कर रहा है तथा यह मीटर जहां के लिए आवंटित हुआ था, उसके स्थान पर दूसरी जगह पर किसने और क्यों लगाया, यह जानने का निगम के स्थानीय अधिकारियों ने आज तक कोई प्रयास नहीं किया। जिसके कारण एक उपभोक्ता जिसने कनेक्शन के लिए आवेदन किया तथा जिसके नाम से कनेक्शन व मीटर आवंटित हुआ, वह अब भी कनेक्शन के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा है, वहीं निगम के कर्मचारियों की लापरवाही के कारण आवंटित स्थान के बजाय दूसरे स्थान पर मीटर लगने एवं कनेक्शन होने से होने वाले विद्यूत उपभोग का भूगतान उपभोग करने वाले को नहीं करना पड़ रहा है। क्या इस पूरे प्रकरण की जांच करवाकर इसमें शामिल अधिकारी व कर्मचारी के खिलाफ विभाग विभागीय एवं कानूनी कार्यवाही करेगा? इस सवाल का जवाब भविष्य के गर्भ में है।

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