नगरपालिका की जमीन पर अतिक्रमण के आरोपियों के खिलाफ न्यायालय ने जारी किये गिरफ्तारी वारन्ट

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नगरपालिका की जमीन पर कब्जा कर रेत की भरती करने वालों के खिलाफ न्यायालय गिरफ्तारी वारंट जारी किये हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार कस्बे के दुलियां बास स्थित मौजीदास जी के धुणे के पास स्थित नगरपालिका की जमीन पर अतिक्रमण कर उसमें रेत की भरती करने के आरोप में नगरपालिका के तत्कालीन अधिशाषी अधिकारी शिशुपालसिंह द्वारा 17 जुलाई 2004 को सुजानगढ़ पुलिस थाने में प्रकाशचन्द्र पुत्र सांवरमल सामरिया व पवन कुमार पुत्र शिवभगवान तोदी निवासीगण सुजानगढ़ के खिलाफ नगरपालिका अधिनियम की धारा 203 के तहत मुकदमा दर्ज करवाया गया था।

थाने में एफआईआर नं. 168/2004 दर्ज मुकदमें नगरपालिका की ओर से आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने अतिक्रमण कर नगरपालिका की जमीन पर मिट्टी का भराव करवाने के बाद वहां बनाये हुए पिल्लरों व बोर्डों का तोड-फोड़ कर खुर्द-बुर्द कर दिया। जबकि तहसील के रिकार्ड के अनुसार मौजीदास जी के धुणे की उत्तर दिशा में स्थित खसरा नं. 125 तादादी एक बीघा आठ बिस्वा भुमि नगरपालिका की है। मामला दर्ज होने के बाद प्रकरण की जांच करते हुए जांच अधिकारी रामूराम मीणा ने मामले में एफआर लगा दी। जिसे एसीजेएम न्यायालय ने स्वीकार कर लिया। जिसके बाद नगरपालिका की ओर से अधिवक्ता एड. सुरेश शर्मा ने एडीजे न्यायालय में रिविजन पेश की। एडीजे ने एसीजेएम न्यायालय को पत्रावली वापस लौटाते हुए पत्रावली का दोबारा अवलोकन कर पक्षकारों के पक्ष सुनने के बाद निर्णय देने के आदेश दिये।

22 मई 2014 को दोनो पक्षों की न्यायालय में बहस हुई। जिसके बाद एसीजेएम न्यायालय ने नगरपालिका के अधिवक्ता एड. सुरेश शर्मा के तर्कों पर मनन करते हुए आरोपी प्रकाशचन्द्र पुत्र सांवरमल सामरिया व पवन कुमार पुत्र शिवभगवान तोदी निवासीगण सुजानगढ़ के खिलाफ प्रथम दृष्टया अपराध मानते हुए नगरपालिका अधिनियम की धारा 203 के तहत प्रसंज्ञान लेकर गिरफ्तारी वारंट से तलब किया है। इस प्रकरण में पुलिस को आगामी तारीख 25 जुन 2014 से पहले आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करना होगा।

क्या है नगरपालिका अधिनियम की धारा 203
जो कोई भी ऐसी किसी भुमि या स्थान पर जो कि निजी सम्पति नहीं है, चाहे ऐसी भुमि नगरपालिका की हो या नहीं हो। किसी भी सार्वजनिक मार्ग में नालियों के ऊपर बनाई गई सीढिय़ों के सिवाय कोई अतिक्रमण करता है, दोष सिद्धि पर आरोपी को कम से कम तीन माह का कारावास एवं तीस हजार से पचास हजार रूपये तक के जुर्माने से दण्डित किया जायेगा।

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