आचार्य पुष्पदन्त सागर के सुशिष्य तथा राष्ट्रीय संत मुनि प्रसन्न सागर महाराज ने ससंघ कस्बे में मंगल प्रवेश किया। लाडनूं से विहार कर मंगलवार सुबह सुजानगढ़ में मंगल प्रवेश करने पर कस्बे के दिगम्बर जैन समाज द्वारा मुनिश्री का स्वागत किया गया। नगर प्रवेश के बाद गाजे- बाजे एवं जुलूस के साथ लाडनूं बस स्टैण्ड स्थित जैन नर्सिंयां पंहूचे।
जहां पूर्व में विराजमान जैन संत विबुद्ध सागर महाराज ने प्रसन्न सागर महाराज की अगवानी की। दोनो संत भाव विह्वल होकर आपस में गले मिले। वहां से दोनो संत गाजे-बाजे के साथ गांधी चौक, घंटाघर होते हुए जैन बड़ा मन्दिर पंहूचे। जहां पर भगवान पाश्र्वनाथ के दर्शन करने के बाद जैन भवन के लिए रवाना हो गये। जैन भवन में आयोजित धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए मुनि प्रसन्न सागर महाराज ने कहा कि भगवान महावीर का अहिंसा का संदेश वर्तमान समय में सबसे अधिक प्रासंगिक है तथा सबसे तेज हथियार है, जिसके सामने विश्व के परमाणु आयुध भी असफल हो जाते हैं।
इस अवसर पर जैन समाज के अध्यक्ष दानमल सौगानी, अशोक कुमार बिनायक्या, प्रकाशचन्द जैन, मिश्रीलाल बगड़ा, खेमचन्द बगड़ा, मुन्नालाल बगड़ा, डा. सरोज कुमार छाबड़ा, अनिल छाबड़ा, मनोज पहाडिय़ा, शैलेन्द्र गंगवाल, नवीन बगड़ा, जम्बू सौगानी, अहिंसा परिषद के नीलम गंगवाल, महावीर पाटनी, धर्मचन्द पाटनी, महिला मण्डल की उषा बगड़ा, प्रमलता सड़ूवाला, बाल मण्डल के मितेश सेठी, अमन बगड़ा सहित अनेक जैन धर्मावलम्बी साथ थे।