तलाक की चौखट पर सुलह से फिर आबाद हुआ एक परिवार

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राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर के निर्देशानुसार अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय कुमार भोजक की अध्यक्षता में तीन बैंचों का गठन कर राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। लोक अदालत की प्रथम बैंच एडीजे अजय कुमार भोजक व सदस्य डा. घनश्यामनाथ कच्छावा, एड. बुद्धिप्रकाश प्रजापत की समझाईश से भगवानाराम व इन्द्रा के बीच तलाक के एक मामले में सुलह करवाई गई। समझाईश के बाद भगवानाराम व इन्द्रा ने साथ-साथ रहने की अपनी रजामंदी दी, इस प्रकार एक परिवार टूटने से बच गया और फिर से आबाद हो गया। सचिव विक्रमसिंह ने बताया कि लोक अदालत की प्रथम बैंच में एमएसीटी के 16 प्रकरण निस्तारित किये गये।

जिनके द्वारा साढ़े इकसठ लाख रूपये के अवार्ड पारित हुए। इसी बैंच में ईजराय के निस्तारित दस प्रकरणों में अठाईश लाख अठानवें हजार चार सौं छियासी हजार रूपये के अवार्ड पारित हुए तथा बैंक प्रि-लीटीगेशन के 94 प्रकरणों में सत्रह लाख अठावन हजार सात सौं चौसठ रूपये के अवार्ड पारित हुए। इसी प्रकार एसीजेएम श्याम कुमार व्यास की अध्यक्षता वाली बैंच में बैंक प्री-लीटीगेशन के 6 प्रकरणों में छियानवें हजार छ: सौ पिच्यासी रूपये के अवार्ड पारित हुए। इसी प्रकार दाण्डिक शमनीय के नौ प्रकरण, धारा 138 एनआईएक्ट के चार व बैंक वसूली के पांच तथा वैवाहिक विवाद के चार प्रकरणों का निस्तारण कर चार लाख सड़सठ हजार छ: सौ साठ रूपये के अवार्ड पारित किये गये। राष्ट्रीय लोक अदालत की बैंच संख्या तीन में न्यायिक मजिस्ट्रेट अजीतसिंह राठौड़ की अध्यक्षता में प्रि-लीटीगेशन के बीएसएनएल के बकाया दस बिलों में बारह हजार एक सौ चौवन रूपये वसूल किये गये।

इसी बैंच में धारा 138 एनआई एक्ट के आठ मामलों में चार लाख ग्यारह हजार रूपये की अवार्ड राशि पारित की गई तथा वैवाहिक विवाद के छ: व अन्य चार सिविल मामलों का निस्तारण किया गया। राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने में प्रो. रामेश्वरलाल अग्रवाल, गिरधर कुमार शर्मा, एड. हरिश गुलेरिया, जगवीर गोदारा, वरिष्ठ रीडर विमल कुमार शर्मा, निजी सहायक हजारीलाल प्रजापत, सुरेश कुमार इन्दौरिया, प्रेमकिशोर चौहान, न्यायिक कर्मचारी अहसान खान, मूलचंद बंसल, महबूब अली सहित विभिन्न बैंकों के प्राधिकृत अधिकारियों व अधिवक्ताओं का सहयोग रहा।

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