कुल की रस्म व दुआ के साथ हुआ उर्स का समापन

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हजरत बदरूद्दीन शाह का तीन दिवसीय सालाना उर्स अंतिम दिन मस्जिद जन्नतुल फिरदौस तेलियान मौहल्ला से चादर पोशी का जुलूस रवाना हुआ, जिसमें सैंकड़ों अकीदतमंदों ने सरों पर फूलों के गुलदस्ते एवं चादरे लेकर बारिश में भीगते हुए जुलूस में शामिल हुए। दुलियां बास स्थित दरगाह बदरूद्दीन शाह पर पंहूच कर सलातोसलाम व दरूद शरीफ का नजराना पेश किया। बाद नमाजे असर कुल शरीफ व दुआ का आयोजन हुआ, जिसमें दूर दराज से आये हुए अकीदतमंदों ने हिस्सा लिया। कुल शरीफ के इस आयोजन में तमिलनाडू से पधारे डा. सैयद मो. रफीक आलम हुसैनी ने शानदार तकरीर की। बुर्जुगों की मजारों से फैज हासिल करनेका संदेश दिया।

पीरे तरीकत सैयद जहूर अली अशरफी ने सबकी भलाई एवं देश दुनिया में अम्नो-शांति की दुआ फरमाई। उर्स के दौरान पधारे सभी मेहमानों का कमेटी सदर इलियास खान, युनूस खान, अनवर राईन, उमरद्दीन, असगर राईन, हाकम अली जोधा, आसिफ, महबूब राईन, रफीक अत्तारी, इरफान खान ने स्वागत किया व आभार व्यक्त किया। संचालन कारी शमीम अख्तर रिजवी ने किया। इससे पूर्व प्रतिभा सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें कक्षा 10-12 वीं व कॉलेजे एवं खेलकूद में प्रथम स्थान पाने वाले 220 मुस्लिम प्रतिभाओं का सम्मान किया गया। कार्यक्रम का आगाज कारी शमीम अख्तर ने तिलावते कुरआन से किया। सभापति हाजी सिकन्दर अली खिलजी की सदारत में हुए कार्यक्रम में मुख्य अतिथि तस्लीम आरीफ व विशिष्ट अतिथि हाजी भंवर अली चौहान व अब्दूल हमीद दैया थे। मुख्य वक्ता हाजी शम्सूद्दीन स्नेही ने मौजूदा दौर में शिक्षा की आवश्यकता पर बल दिया व हजरत बदरूद्दीन शाह के जीवन पर प्रकाश डाला। यंग्स क्लब के सचिव गिरधर शर्मा ने सम्मान पाने वाले छात्र-छात्राओं व अन्य प्रतिभाओं की प्रशंसा की व इंतेजामिया कमेटी का आभार व्यक्त किया।

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