मंगलवार देर शाम तक भी नहीं निकाला जा सका राधेश्याम

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तहसील के गांव तैलाप में सोमवार दोपहर में बोरवैल में गिरे ढ़ाई वर्षिय बालक को दूसरे दिन मंगलवार को भी निकालने में सेना व प्रशासन को कोई सफलता नहीं मिली। सोमवार शाम शुरू हुआ ऑपरेशन राधेश्याम मंगलवार देर शाम को समाचार लिखे जाने तक जारी था। तीस घंटे से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी सेना आस का दामन थामे रखते हुए अपने अभियान में जुटी हुई थी। बोरवेल के पास करीब तीस फुट खुदाई करने के बाद मंगलवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे खुदाई बंद कर दी गई। मंगलवार सुबह बोरवेल में करीब पैंतालिस फुट पर बोरी मिलने के बाद सेना ने बोरवेल में कांटा डालकर बट्टचे को खोजने का प्रयास किया। लेकिन चार सौ फुट तक कांटा/बिलाई के जाने के बाद भी बार&बार खाली लौट रही थी। दिन भर चले बचाव अभियान के दौरान सेना ने बोरवेल के अन्दर बट्टचे तक ऑक्सीजन पंहूचाने का प्रयास किया तथा कैमरा बोरवेल के अन्दर नीचे तक पंहूचाकर बट्टचे की स्थिति के बारे में थाह लेने का प्रयास किया। लेकिन सेना का प्रयास हर बार विफल साबित हो रहा था। वहीं सेना दुगुने जोश के साथ नये सिरे से प्रयास करने में जुट रही थी। देर शाम को पानी में देखने वाले कैमरे के सहारे भी बÞो के बारे में जानकारी प्राप्त करने के प्रयास किये जा रहे थे। जो समाचार लिखे जाने तक जारी थे।

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ये है प्रकरण
प्रकरणानुसार साण्डवा थानान्तर्गत तैलाप गांव के खेत में बनी भंवरलाल मण्डा की ढ़ाणी में बने ट्यूबवैल की मोटर खराब हो जाने के कारण मोटर निकालकर बोरवैल का मुंह बोरी से ढ़का हुआ था। सोमवार दोपहर को भंवरलाल और उसके भाई पेमाराम के ट्यूबवैल के पास खेल रहे थे। तभी पेमाराम के ढ़ाई वर्षिय पुत्र राधेश्याम का पैर ट्यूबवैल के मुंह पर बंधी बोरी पर लगा और वह बोरी सहित ट्यूबवैल के अन्दर गिर गया। उसे बोरवैल में गिरता देखकर परिजन दौड़कर आये] लेकिन तब तक देर हो चूकी थी और बट्टचा करीब पचास फुट नीचे चला गया। घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामिण एकत्रित होने लगे तथा साण्डवा थाने में सूचना दी। सूचना मिलने पर साण्डवा थानाधिकारी राजेश सिहाग ने घटना से उट्टचाधिकारियों को अवगत करवाकर मौके पर पंहूचे। तब तक ग्रामीण बचाव में जुट चूके थे और पांच ट्रैक्टरों व जेसीबी मशीनों से बोरवेल के पास खुदाई शुरू कर दी गई थी। सोमवार देर रात जिला कलेक्टर रोहित गुप्ता ने पुलिस अधीक्षक राहुल कोटोकी व एएसपी यादराम फांसल के साथ मौके पर पंहूचकर राहत कार्य का जायजा लिया और उचित दिशा निर्देश दिये। जिला कलेक्टर ने बीकानेर सैन्य अधिकारियों से वार्ता कर सहयोग मांगा। जिस पर सेना के अधिकारियों ने मामले की गम्भीरता को देखते हुए तुरन्त ही टीम को रवाना कर दिया। टीम ने देर रात मौके पर पंहूचकर बचाव कार्य शुरू कर दिया] जो मंगलवार देर शाम को समाचार लिखे जाने तक अनवरत जारी था।

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ये पंहूचे अधिकारी
घटना की जानकारी मिलते ही उपखण्ड अधिकारी फतेह मोहम्मद खान, तहसीलदार सुरेन्द्र प्रसाद, पुलिस उप अधीक्षक हेमाराम सरपंच संघ अध्यक्ष केशराराम गोदारा, ग्राम सेवक घनश्याम भाटी मौके पर पंहूचे तथा बाघसरा आथुणा के डा- अनिल चौधरी कानूता पीएचसी स्टाफ, एम्बूलैंस मय ऑक्सीजन सिलेण्डरों के मौके पर पंहूची। विधायक खेमाराम मेघवाल ने सोमवार देर रात तथा जिप सदस्य पूसाराम गोदारा ने मंगलवार को राहत कार्य का जायजा लिया।

किसानों और प्रशासन की लापरवाही
देश के अनेक भागों में ट्यूबवैल में बट्टचों के गिरने से होने वाले हादसों के बाद केन्द्र व रा*य सरकार द्वारा दिये गये निर्देशों की पालना अगर स्थानीय प्रशासन द्वारा की जाती तो शायद इस हादसे से बचा जा सकता था। लेकिन प्रशासन ने कभी भी आम जन के घरों व खेतों एवं अन्य स्थानों पर बने ट्यूबवैलों की स्थिति जानने का प्रयास ही नहीं किया। क्षेत्र में ट्यूबवैलों की सिंचाई से मुंगफली, सरसों, तारामीरा सहित अन्य नगद फसलों की बुआई की जाती है। लेकिन प्रशासन ने कभी भी ग्रामिणों को ट्यूबवैल के सम्भावित खतरों के बारे में जानकारी नहीं दी तथा ना ही ये बताया कि जमीन ये ट्यूबवैल की ऊंचाई कितनी होनी चाहिये। अगर प्रशासन समय & समय पर ट्यूबवैलों की जांच करता और किसानों को ट्यूबवैलों की ऊंचाई और उन्हे ढ़कने के बारे में समय & समय पर हिदायत दी जाती तो इस हादसे से सम्भवतया बचा जा सकता था। क्या प्रशासन अब भी इस हादसे से सीख लेते हुए क्षेत्र के ट्यूबवैलों की ऊंचाई बढ़ाने और उन्हे ढ़कने के लिए किसानों को सख्त हिदायत देगा।

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