सरकार ने गरीब लोगो को किया बेघर

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Residential-Loans

शहरी बी.पी.एल. परिवारो को आवासीय ऋण को पहली किश्त रु. 25000/- माह अप्रैल में दी गई थी जिससे उन परिवारों ने मकान बनवाने का कार्य शुरू किया था और एक कमरे शोचालय आदि का कार्य नीव से लेकर खिड़की लगते तक सरकार के नियमानुसार पूर्ण कर लिया था तथा नगरपालिका द्वारा सर्वे भी किया जा चूका हैं । मगर दूसरी किश्त के पैसे न मिलने के कारण कार्य को बंद करना पड़ा हैं ।

मकान का कार्य शुरू करने से पहले जो उनके पास कच्चे कमरे छप्पर आदि थे उनको तोड़कर सरकार के नियमानुसार निर्माण शुरू करवाया था जो पहली किश्त में मकान 2 से ढाई फीट तक ही बन पाया हैं । सरकार आवासीय ऋण के लिए 3 किश्तों में पैसे देने थे पर दूसरी और तीसरी किश्त का भुगतान नहीं किये जाने से कार्य अधुरा रह गया है जिससे उनके पास रहने के लिए कोई जगह नहीं हैं । उन्होंने कभी नहीं सोचा था की सरकार उन्हें छत देने की जगह जो उनके पास कच्ची छत थी वो भी छीन लेगी और उन्हें बारिश और सर्दी के मोसम में बेघर कर देगी । सुजानगढ़ एक ऐसी तहसील हैं जिसमे दूसरी किश्त का भुगतान नहीं किया गया हैं बाकि तहसीलों में तो तीसरी किश्तों का भी भुगतान कर दिया गया हैं ।

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