हत्या के आरोपी को आजीवन कारावास

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sujangarh-Murder

हत्या करने और उसके बाद साक्ष्य नष्ट करने के मामले में अपर जिला व सत्र न्यायाधीश नेपालसिंह ने आरोपी बाबूलाल पुत्र नानूदीन सोलंकी उम्र 22 वर्ष निवासी बीदासर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अपर लोक अभियोजक सूरजमल यादव ने प्रकरण की जानकारी देते हुए बताया कि 24 अगस्त 2011 को परिवादी आरीफ पुत्र अब्दूल सलाम बाबर सिलावट निवासी बीदासर ने छापर थाने में हाजिर होकर रिर्पोट दी कि 31 जुलाई 2011 को उसका भाई परवेज गुम हो गया था, जिसकी गुमसूदगी थाने में दर्ज करवाई हुई है। जिसे उसी दिन बाबूलाल पुत्र नानूदीन सोलंकी उम्र 22 वर्ष निवासी बीदासर के साथ देखा गया था। रिर्पोट में बताया गया कि नदीम पुत्र अब्बास ने परिवादी को बताया कि बाबूलाल सोलंकी ने परवेज को मारकर बीदासर में ही कहीं दबा दिया है, ये बात उसे आरोपी बाबूलाल ने स्वयं बताई थी। यादव ने बताया कि छापर पुलिस ने मामले की जांच कर न्यायालय में आरोप पत्र भादंसं की धारा 302 तथा 201 के तहत पेश किया गया। परवेज की हत्या को प्रमाणित करने के लिए अभियोजन पक्ष ने 13 गवाहों को न्यायालय में पेश किया।

कंकाल में बदलने के लिए डाला केमीकल
नदीम से जानकारी मिलने के बाद आरोपी को पकड़ कर उसकी निशानदेही पर नेमीचन्द नाहटा के कुएं में बने कोठे में से मृतक परवेज का कंकाल पुलिस ने बरामद कर लिया। आरोपी ने पुलिस को पुछताछ में बताया कि परवेज को मारने के बाद उसकी लाश बदबू नहीं मारे, इसलिये उस पर केमीकल छिड़क दिया। जिसके प्रभाव से एक ही महीने में शव कंकाल में तब्दील हो गया।

शराब के नशे में की हत्या
आरोपी ने पुलिस को पुछताछ में बताया कि वारदात की शाम को वह शराब के नशे में घूम रहा था। तभी उसे परवेज मिला, जिसे 20 रूपये का लालच देकर अपने साथ ले गया और गला घोंट कर उसने परवेज की हत्या कर दी।

परिस्थिति जन्य साक्ष्य के आधार पर हुई सजा
घटनास्थल पर मिले परिस्थिति जन्य साक्ष्य के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। पीपी यादव ने बताया कि मौके पर पुलिस को मिली मृतक परवेज की नीले रंग की पेंट तथा मृतक का कंकाल बरामद हुआ। आरोपी द्वारा नदीम के समक्ष अपराध की स्वीकरोक्ति तथा आरोपी और मृतक को घटना से पूर्व साथ देखा जाना आदि साक्ष्य न्यायालय में पेश किये गये। जिनको एवं गवाहों के बयानों को ध्यान में रखते हुए विद्वान न्यायाधीश नेपालसिंह ने आरोपी बाबूलाल सोलंकी को हत्या के आरोप में भादंसं की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास तथा पंाच हजार रूपये जुर्माना, जुर्माना अदा नहीं किये जाने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास और साक्ष्य मिटाने के आरोप में भादंसं की धारा 201 में आरोपी को सात साल का कारावास एवं एक हजार रूपये का जुर्माना, जुर्माना नहीं चुकाने पर सात दिन के अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई गई।

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