छात्र शक्ति से घबराये मास्टर भंवरलाल मेघवाल ने स्थगित किया विद्यालय भवन का उद्घाटन

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रिक्त पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर विगत तीनों दिनों से आन्दोलनरत छात्र-छात्राओं से घबराये विधायक मा. भंवरलाल मेघवाल ने तहसील के गांव भीमसर स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के नवनिर्मित भवन का उद्घाटन करने का कार्यक्रम ऐन वक्त पर स्थगित कर दिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार तहसील के भीमसर के राजकीय उ. मा. विद्यालय कुल 26 में से 13 पद रिक्त हैं। जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इन रिक्त पदों पर अध्यापकों को पदस्थापन करने की मांग को लेकर तीन दिनों से छात्र-छात्रायें आन्दोलनरत है। छात्राओं का कहना है कि बार-बार अध्यापकों की मांग किये जाने के बावजूद शिक्षा विभाग ने इस ओर ध्यान देना भी मुनासिब नहीं समझा। जिसके कारण उन्हे हड़ताल तथा तालाबन्दी करने का निर्णय लेना पड़ा। विषयाध्यापकों की कमी से प्रभावित होकर आन्दोलनरत विद्यार्थियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगे नहीं मानी जाती है तब वे अपना आन्दोलन जारी रखेंगे। विद्यार्थियों का कहना है कि हमारी मांगों पर हमें राजनीति नहीं अध्यापक चाहिये। इसी विद्यालय में एक करोड़ 14 लाख रूपये की लागत से नवनिर्मित भवन का उद्घाटन विधायक मा. भंवरलाल मेघवाल सोमवार को करने वाले थे, लेकिन विद्यार्थियों के आन्दोलन के चलते सम्भावित होने वाले भारी विरोध के कारण उन्होने उद्घाटन कार्यक्रम को ऐन वक्त पर स्थगित कर दिया। विद्यार्थियों के विरोध को देखते हुए गत दो दिनों से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विद्यार्थियों और ग्रामिणों से सम्पर्क साधकर आन्दोलन का स्थगित करवाने के प्रयास कर रहे थे। लेकिन उन्हे अपने प्रयासों में सफलता नहीं मिलने तथा उद्घाटन समरोह का भारी विरोध होने की जानकारी मिलने के कारण ऐन वक्त पर कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया।

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जमकर की नारेबाजी
विद्यालय में अध्यापकों की नियुक्ति की मांग को लेकर आन्दोलनरत छात्र-छात्राओं ने सरकार व प्रशासन तथा क्षेत्रिय विधायक मा. भंवरलाल मेघवाल के खिलाफ जमकर नारे बाजी की।

वोटों के लालच में नये विद्यालय खोलना कहां कि बुद्धिमानी
राज्य सरकार द्वारा पूर्व में संचालित विद्यालयों में स्टाफ की पूर्ति नहीं कर पाने के बावजूद भी जनप्रतिनिधि वोटों के लालच में विद्यालयों को क्रमोन्नत करने तथा नये विद्यालय खोलने की घोषणायें करते रहते हैं तथा खोलते रहते हैं। जब पहले से चल रहे विद्यालयों की दशा और दिशा ही नहीं सुधर रही है तथा उनमें पर्याप्त स्टाफ नहीं लगा पा रहे हैं तो फिर केवल वोटों के लिए नये विद्यालय खोलना कहां कि बुद्धिमानी है। जनता के खुन पसीने की कमाई के करों के रूप में सरकार के खजाने में जमा लाखों करोड़ों रूपये लगाकर नये विद्यालय खोलने तथा उनके शिलान्यास व उद्घाटन कर आम जनता के बीच वाह-वाही लुटने के प्रयास जनप्रतिनिधियों द्वारा सदा से किया जाता रहा है। लेकिन विद्यालयों में रिक्त पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति करने के अपने कर्तव्य को ये भुल जाते हैं। जिसके कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है। एक ओर सरकार विद्यार्थियों को नि:शुल्क शिक्षा देने, लैपटॉप बांटने पर इतराते हुए प्रदेश के सभी समाचार पत्रों में विज्ञापन जारी कर वाह-वाही लुटने के प्रयास के साथ ही आगामी चुनावों में वोटों की फसल काटने के प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर शिक्षकों की कमी के चलते विद्यालयों में विद्यार्थियों को पढ़ाई छोड़कर तालाबंदी करने तथा आन्दोलन करने का रास्ता अपनाना पड़ रहा है। एक ओर सरकार निजी विद्यालयों की तर्ज पर सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों से बड़ी अपेक्षायें रखती है, परन्तु उन अपेक्षाओं की पूर्ति के लिए सबसे ज्यादा आवश्यक शिक्षकों की विद्यालयों में नियुक्ति नहीं कर पा रही है।

सालासर में भी आन्दोलनरत है छात्रायें
सालासर के दामोदरलाल सरावगी राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में भी छात्राओं ने रिक्त पदों पर अध्यापकों की नियुक्ति की मांग को लेकर अपना आन्दोलन लगातार पांचवे दिन जारी रखते हुए विद्यालय का ताला नहीं खोलने दिया। जिससे शैक्षणिक कार्य नहीं हो पाया। सनद रहे कि शनिवार को छात्राओं ने विधायक मा. भंवरलाल मेघवाल का पुतला भी जलाया था।

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