सुन्नी इतेज्मा का नूरानी जलसा व अमली व तरबियती कार्यक्रम सम्पन्न

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स्थानीय ईदगाह मैदान में सैयद जहूर अली अशरफी की सदारत में मसलके सुन्नतवल जमाअत के मुसलमानों का एक रोजा सुन्नी इतेज्मा का नूरानी जलसा व अमली व तरबियती कार्यक्रम का रविवार का आगाज कारी मंसूर आलम नूरी ने तिलावते कुरान से किया। सुन्नी दावते इस्लामी के प्रचारक मोहम्मद हनीफ नूरी से बुर्दाशरीफ के बाद नबी ए करीम की शान में सुबह तैबा में हुई बटता है बाड़ा नूर का। सदका लेने नूर का आया है तारा नूर का .. नामक नात शरीफ पेश की। कारी मो. इरफान जयपुरी ने भर दो झोली मेरी या मुहम्मद, लौट कर न जाऊंगा खाली कुछ नवासो का सदका अता हो दर पे आया हूं बनके सवाली पेश कर वाह वाही लूटी। सम्भल के मौलाना जिया उल मुस्लफा ने अमला व इस्लाही कार्यक्रम के अन्तर्गत बजु व गुस्ल तया तहारत के मसाईल बयान करते हुए कहा गुसल व वजू करने से मुसलमान के गुनाह झड़ते है।

उन्होने कहा कि मुसलमान का उठना, बैठना, चलना, खाना, सोना आदि प्रत्येक काम नबी की सुन्नत के मुताबिक होना चाहिए। दावते इस्लामी के मो. सुहेल ने कहा कि मुसलमान की जिन्दगी यादे खुदा व यादे मुहम्मद में गुजरनी चाहिए। उन्होने दलाल व हराम की तमीज, दीन की दावत, वक्त की कुरबानी तब्लीग के लिए काफिलों में जाने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दुसरे चरण का आगाज कारी मोहम्मद शरीफ ने नाते करीम गुनगुना कर किया। प्रमुख वक्ता फजलुल्लाह देहलवी ने मियां – बीबी के हुकूक, सुन्नीअकाईद व नवपुबको में फैली बुराईयों की इस्लाह पर तकरीर की। उन्होने समाज में फैली बिद्आत व अकाईद सम्बंधी सवालों के कूरानों – हदीस की रोशनी में जवाब दिया। अन्त में दूरूदो सलाम पढा गया। इस अवसर पर विधायक मा.भंवरलाल मेघवाल, पालिकाध्यक्ष डॉ. विजयराज शर्मा, पूर्व प्रधान पुसाराम गोदारा ने जलसे में शामिल होकर मुस्लिम भाइयों के अति सद्भावना वक्त की। कार्यक्रम में सुजानगढ सहित लाडनूं, सीकर, चूरू, डीडवाना, रतनगढ सहित आस पास के क्षेत्रों से सैकड़ो मुसलमानों ने शिकरत की।

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