मोदी की राह में आडवाणी बाधक – स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती

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गत दिनों कस्बे के माण्डेता स्थित कानपुरी आश्रम मे आयोजित धर्म सभा को सम्बोधित करने आये सुमेरूपीठ काशी के जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती ने आस-पास संवाददाता राजकुमार चोटिया से भगवा आतंकवाद, राम मन्दिर, नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने और कुम्भ में शंकराचार्यो को लेकर उठे विवाद पर बेबाक बातचीत की। भागवत सहित समाज में होने वाले धार्मिक आयोजनों में श्रद्धा के स्थान पर दिखावे के बढ़ते प्रभाव के बारे में सुमेरूपीठ काशी के जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती ने कहा कि कहा कि दुनिया भौतिकवाद से त्रस्त है। धर्म घट नहीं रहा बढ़ रहा है।

उन्होने कहा कि कुम्भ में स्नान के लिए एक डूबकी लगाने के लिए तीन करोड़ से अधिक श्रद्धालु पंहूचे थे। दस लाख से अधिक अमेरिकी नागरिकों ने कुम्भ में स्नान कर भारत के अध्यात्म को जानने का प्रयास किया है। धर्म के प्रति बढ़ती अरूचि और दिखावे के लिए सता में आये विकारों को दोषी ठहराते हुए शंकराचार्य ने कहा कि नैतिक शिक्षा की कमी के कारण ही नई पीढ़ी में धर्म के प्रति अरूचि उत्पन्न हो रही है। धर्म को मानव जीवन का अंग बताते हुए सुमेरूपीठाधीश्वर ने कहा कि धर्म कहने के लिए नहीं धारण करने के लिए है। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बारे में पूछे गये सवाल के जवाब में स्वामी नरेन्द्रानन्द ने कहा कि नेता घोषित करना पार्टी का काम है। भाजपा मोदी को अपना नेता घोषित करती है और जनता का समर्थन मिलता है तो मोदी अवश्य प्रधानमंत्री बनेंगे। उन्होने कहा कि देश को हिन्दूवादी के साथ-साथ राष्ट्रवादी छवि के व्यक्ति को सर्वोच्च सता पर बिठाना चाहिये।

देश में अब तक धर्म निरपेक्ष प्रधानमंत्री हुए हैं और आतंकवाद, उग्रवाद, भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए लोगों को मोदी से अपेक्षायें व उम्मीदें हैं। पूर्व उपप्रधानमंत्री व वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी को मोदी की राह में बाधक बताते हुए शंकराचार्य ने कहा कि आडवाणी को देशहित में मोदी का सहयोग करना चाहिये। उन्होने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह अच्छे आदमी है, पर वे काम नहीं कर पा रहे हैं, उनका रिमोट सोनिया गांधी के हाथ में है। स्वतंत्र करने पर मनमोहनसिंह अच्छे से कार्य कर पायेंगे। भगवा आतंकवाद को लेकर गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे के बयान पर स्वामी नरेन्द्रानन्द ने कहा कि गृहमंत्री का बयान आतंकवादियों का बयान है। इससे समाज में सद्भाव बिगड़ता है। हिन्दू भगवा आतंकवाद के पर्याय नहीं है।

जो यह कहता है, वह अज्ञानता का परिचय दे रहा है। भगवा को राष्ट्रीयता का प्रतीक बताते हुए जगद्गुरू ने कहा कि भगवा त्याग, शान्ति और राष्ट्रीयता का प्रतीक होने के साथ-साथ करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा है। कुम्भ मेले में शंकराचार्यो को लेकर हुए विवाद पर सुमेरूपीठाधीश्वर ने कहा कि शंकराचार्यों को लेकर उत्पन्न विवाद गलत है। स्वामी स्वरूपानन्द तीनों पीठों की जमीन पर कब्जा कर रहे थे, जिसको लेकर यह विवाद हुआ। उन्होने कहा कि शंकराचार्य को झूठ का सहारा नहीं लेना चाहिये, कुम्भ में विवाद को कोई स्थान नहीं है। जगद्गुरू ने कहा कि कोई भी सनातनी मां गंगा का बहिष्कार नहीं कर सकता। कुम्भ का बहिष्कार गंगा का बहिष्कार करने के समान है। राम मन्दिर के मुद्दे पर शंकराचार्य ने कहा कि इस मुद्दे को तीन प्रकार से सुलझाया जा सकता है।

एक तो हिन्दू-मुस्लिम दोनो समुदाय बैठ कर इसका रास्ता निकाले तथा दूसरा न्यायपालिका समय रहते निर्णय दे और तीसरा कि भारत सरकार जनभावना व आस्था को ध्यान में रखकर संसद में प्रस्ताव लाये। न्यायपालिका के निर्णय को लेकर शंकराचार्य ने कहा कि अगर न्यायपालिका का निर्णय सरकार की मंशानुकूल नहीं आता है तो सरकार शाहबानों काण्ड की तरह संसद में प्रस्ताव पारित कर न्यायापालिका के फैसले को बदल देगी। उन्होने सरकार से संसद में प्रस्ताव पारित कर रामजन्म भुमि पर भव्य विशाल मन्दिर का निर्माण करने का मार्ग प्रशस्त करने की मांग की।

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