मिलना तो वही है जो मुकद्दर में लिखा है फिर क्यों ना करे उसे ईमान से हासिल

SHARE

Sujala-confluence

Sujala-confluence

स्थानीय रामा होटल में सुजला संगम के तत्वाधान में अंचल के साहित्यकारों, कवियों द्वारा एक काव्य गोष्ठी का आयोजन वरिष्ठ अधिवक्ता एवं साहित्यकार श्यामसुन्दर वात्स्यान की अध्यक्षता में किया गया। काव्य गोष्ठी के मुख्य अतिथि लाडनूं के भंवरलाल सुथार तथा विशिष्ट अतिथि रामकुमार तिवाड़ी थे। एड. सुरेन्द्र मिश्रा के काव्य पाठ से आरम्भ हुई गोष्ठी में युवा साहित्यकार एड. घनश्यामनाथ कच्छावा ने मुक्तक प्रस्तुत कर वाह-वाही लुटी।

एड. सुल्तान खां राही ने कृष्ण हो या राम हो, अरिहन्त हो या बुद्ध सबकी पहली सीख नियत रखो शुद्ध सहित अपने काव्य पाठ में ईश्वर के प्रति आस्था एवं विश्वास को सुदृद्ध करते हुए कविता के माध्यम से बताया कि मिलना तो वही है जो मुकद्दर में लिखा है फिर क्यों ना करे उसे ईमान से हासिल। लाडनूं के यासीन खां अख्तर ने वतन की खिदमत करेंगे यारों से देश प्रेम को उजागर करते हुए तालियां बटोरी। युवा एवं उदीयमान कवि हरिराम मेघवाल ने ऐ नेताजी व दायजो के द्वारा प्रशंसा पाई। कस्बे के व्यापारी जितेन्द्र मिरणका ने इश्क व भु्रण हत्या तथा टी.वी. चैनलों के दुष्प्रभाव को अपने काव्य पाठ के माध्यम से मजबूती से उठाया।

लाडनूं के युवा कवि बाबूलाल ने लुप्त होते बचपन की यादों को सहेजते हुए बचपन की खुशबू को सबके सामने ऐसे बिखेरा कि उपस्थित श्रोता वाह-वाह कर उठे। लाडनूं के रामकुमार तिवाड़ी ने सुजला संगम संस्था के गठन का औचित्य बताते हुए कहा कि सुजानगढ़, जसवन्तगढ़, लाडनूं के साहित्यकारों एवं कवियों की संस्था के गठन का प्रस्ताव वरिष्ठ साहित्यकार एड. श्याम जी गुरू जी का था। जिसे मुर्तरूप दिया जा रहा है। तिवाड़ी ने कहा कि संस्था के गठन से उदयीमान प्रतिभाओं को मंच और प्रेरणा मिलेगी। तिवाड़ी ने कुंची तथा पैसा ही सब कुछ छलावा है कवितायें सुनाई।

हाजी शम्सूद्दीन स्नेही ने शिक्षक भर्ती प्रक्रिया पर व्यंग्य करते हुए जलता दीप बुझाऊं कैसे तथा तमन्ना में अब तक कुंवारी है और दाढ़ी रखने वाला हर इंसान मुल्ला नहीं होता है सुनाई। संचालन करते हुए लाडनूं के जाने माने कवि एवं गजलकार राजेश विद्रोही ने बिना मकसद जये जा रहा हूं तथा देश में भुख से बिलखते व संघर्ष करते बचपन और विकास की दर्दनाक तस्वीर अपनी गजलों के माध्यम से प्रस्तुत करते हुए कहा कि जो दावा फील गुड का कर रहे थे, उनको दिखलाओ रोटी के लिए रोते बच्चे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे एड. श्याम जी गुरू जी ने चुटकलों के माध्यम से हास्य रस की गंगोत्री में डूबकी लगवाई।

मुख्य अतिथि भंवरलाल जांगीड़ ने एक लुहार का बेटा नामक कविता का पाठ करते हुए श्रम करने की सीख दी। कार्यक्रम के अंत में लाडनूं से पधारे कवियों एवं साहित्यकारों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर उनका स्वागत किया गया। काव्य गोष्ठी में भंवरलाल इन्दौरिया, तनसुख रामपुरिया, रूकमानन्द शर्मा, दुर्गादत माटोलिया, लीलाधर शर्मा, महावीर शर्मा, भंवरलाल जांगीड़, रामचन्द्र सोनी, नारायण प्रसाद बेदी, वैद्य सत्यव्रत शर्मा, बृजगोपाल शर्मा, मांगीलाल भाटी, राधेश्याम लाटा, परमानन्द मिश्रा, एड. श्यामसुन्दर खण्डेलवाल, अनिल शर्मा, एड. हेमन्त शर्मा सहित अनेक साहित्य रसिक उपस्थित थे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here