समस्याओं को जानते हुए भी उन्हे दूर नहीं करना चाहते देश के नेता – दीपक मितल

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Jago-Party

कस्बे के गांधी चौक में आयोजित जागो पार्टी की सभा को सम्बोधित करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष दीपक मितल ने कहा कि कानून बनाने से कुछ नहीं होगा, जब तक उसका पालन करने एवं करवाने वालों में व्याप्त भ्रष्टाचार को समाप्त नहीं किया जायेगा। जिस दिन व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार समाप्त हो जायेगा, उसी दिन मौजूदा कानून भी प्रभावी हो जायेंगे।

मितल ने आरक्षण का विरोध करते हुए कहा कि अच्छी शिक्षा मिलने पर अच्छे नागरिक होंगे और जब अच्छे नागरिक शासन एवं प्रशासन में होगे तथा सभी प्रकार की व्यवस्थाओं में होंगे तो देश को विकसीत होने से कोई नहीं रोक पायेगा। उन्होने सिंगापुर का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत के दस वर्ष बाद आजाद हुए सिंगापुर में चारों ओर खुशहाली है, वहां कि जनता सम्पन्न है और उसके विपरित भारत में नेता सम्पन्न है और जनता भुखी और गरीब है तथा नेता सम्पन्न है। उन्होने कहा कि देश के नेता समस्याओं को जानते हुए भी उन्हे दूर करना नहीं चाहते।

मितल ने कहा कि जातिवाद के नाम पर वोट देना बंद करने पर ही भ्रष्टाचार समाप्त होगा। मितल ने कहा कि बाजार से कोई सामान खरीदकर लाते समय कितना मोल-तोल करते हैं, परन्तु जब वोट देने का समय आता है तब प्रत्याशी की तुलना क्यों नहीं करते। सोच समझकर अच्छे प्रत्याशी को वोट दें। जागो पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पूसाराम जाट ने कहा कि वी.पी. के मण्डल के बाद राम मन्दिर के नाम पर भाजपा का कमण्डल आया। परन्तु जनता की दशा नहीं बदली। जाट ने बलात्कारी, भ्रष्टाचारी एवं आतंकवादी को फांसी देने की मांग की।

जाट ने कहा कि आरक्षण दीमक की तरह देश का सत्यानाश कर रहा है। देशबंदु जोशी ने कहा कि आरक्षण से सभी जातियों एवं वर्गों में वैमनस्यता एवं भेदभाव बढ़ा है। सभी राजनैतिक पार्टियों की नीतियां अमीरों के हित में होती है। सम्भागीय महासचिव देशदीपक ने आरक्षण को कैंसर बताते हुए इसे समाप्त करने के लिए जागो पार्टी का सदस्य बनने एवं समर्थन करने की अपील की। सभा की अध्यक्षता मिशन 72 के प्रदेशाध्यक्ष सुरेश शर्मा ने की। चूरू जिला अध्यक्ष बनवारीलाल किरोड़ीवाल, तारानगर अध्यक्ष जयवीर गोदारा, सुजानगढ़ अध्यक्ष छगनाराम नायक, सरदारशहर अध्यक्ष प्रवीण सैनी, रतनगढ़ अध्यक्ष बाबूलाल प्रजापत, जिला महासचिव किशनलाल, जिला सचिव कासम टुणिया, महामंत्री कैलाश सैनी ने भी सभा को सम्बोधित किया। सभा का संचालन बाबूलाल प्रजापत ने किया।

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