आत्मा के समर्पण से रिझते हैं भगवान – संत हरिशरण

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स्थानीय नया बास स्थित शांति कुंज में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रवचन देते हुए व्यासपीठ पर विराजमान संत हरिशरण महाराज ने कहा कि हम भेगवान एवं संतो को बहुत मानते हैं, पर उनके द्वारा कही गई बातों को नहीं मानते और अपना आग्रह जोड़ते हुए उनके बतायेनुसार कार्य करने में असमर्थता जताते हैं। उन्होने कहा कि जब शरण में चले गये हो तो फिर जिसके शरण में हो उसके मन की करें ना की अपने मन की। इसलिये भगवान को अपना सर्वस्व सौंपकर जिस प्रकार वे रखते हैं वैसे रहें और जिस प्रकार वे चलाते हैं, उसी प्रकार चलें। इसमें अपने मन की नही करें। आत्मा के समर्पण से ही भगवान रिझते हैं। कथा के दौरान पूर्व विधायक रामेश्वर भाटी, मांगीलाल भाटी, बुद्धिप्रकाश सोनी, श्यामलाल मोयल, फूलचन्द मोयल, राधेश्याम लाटा, दर्शनकुमार भरतवाल सहित अनेक श्रद्धालुओं ने भागवत श्रवण कर पुण्य लाभ कमाया। कथा आरम्भ से पूर्व मुख्य यजमान आनन्दीलाल गोठडिय़ा ने सपत्निक भागवत जी का पूजा-अर्चना की एवं आरती की। कथा को सफल बनाने में पार्षद एड. मनीष गोठडिय़ा, जगदीशप्रसाद गोठडिय़ा, सन्तोष कुमार गोठडिय़ा, डूंगरमल गोठडिय़ा, प्रेमप्रकाश गोठडिय़ा, मुकेश गोठडिय़ा, महेश गोठडिय़ा आदि जुटे हुए हैं।

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