रैली के बाद हुई सभा एक दिसम्बर को सुजानगढ़ बंद की घोषणा

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राजगढ़ में मनोज न्यांगली पर हुए कातिलाना हमले के मामले में सांसद रामसिंह कस्वां एवं उनकी विधायक पत्नी कमला कस्वां के खिलाफ मामला दर्ज करवाने से आक्रोशित जाट समाज ने किसान छात्रावास से रेलवे स्टेशन, बस स्टैण्ड, स्टेशन रोड़, घंटाघर, गांधी चौक, लाडनूं बस स्टैण्ड, गणपति चौक होते हुए उपखण्ड कार्यालय पंहूची, जहां पंहूचकर रैली आम सभा में तब्दील हो गई। सभा को सम्बोधित करते हुए युवा कॉमरेड़ नेता रामनारायण रूलाणियां ने कहा कि सांसद रामसिंह कस्वा पर लगे आरोपों को आधारहीन बताते हुए मुकदमें को वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि अपराधी प्रवृति के लोग किसी भी समाज के नहीं होते हैं। रूलाणियां ने एक दिसम्बर को सुजानगढ़ बंद का आह्वान किया, जिसका उपस्थितजनों ने समर्थन किया।

भाजपा जिला महामंत्री बुद्धिप्रकाश सोनी ने कहा कि विगत दो साल में जिले के हालात खराब हो गये हैं। गोलीकाण्ड प्राय: होने लगे हैं। सोनी ने सांसद रामसिंह कस्वां को जन-जन का नेता बताते हुए कहा कि जातिगत राजनीति से ऊपर उठकर प्रत्येक आम आदमी का कार्य करने वाले किसान नेता के खिलाफ राजनीतिक द्वेषतापूर्वक मामला दर्ज करवाया गया है। सोनी ने कहा कि इस प्रकार के झुठे मुकदमों से रामसिंह कस्वां की छवि खराब करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसे जिले की जनता सफल नहीं होने देगी। किसान नेता एवं पूर्व सरपंच कुन्दनमल पुनिया आबसर ने पुलिस व प्रशासन को चंद लोगों के हाथों की कठपुतली बताते हुए कहा है कि जब तक पुलिस व प्रशासन स्वविवेक से काम नहीं कर दूसरों के इशारों से काम करेंगे तब तक इस प्रकार अन्याय होते रहेंगे। पुनियां ने बेहद आक्र ामक बोलते हुए जिला पुलिस प्रशासन द्वारा लाईन हाजिर किये गये नौ निर्दोष पुलिसकर्मियों को बहाल करने की मांग की।

कानाराम कांटीवाल ने कहा कि समाज में जातीय वैमनस्यता के बीज बो कर सामाजिक सद्भाव को समाप्त करने के कुत्सित प्रयासों को सफल नहीं होने दिया जायेगा। सभा को हरिसिंह जानूं, किसान नेता इलियास खां, पूर्व पार्षद सिराज खां, सुजला महाविद्यालय अध्यक्ष हितेष जाखड़, चूनाराम दूसाद, वैद्य भंवरलाल शर्मा, सुभाष ढ़ाका ने भी सम्बोधित किया। इससे पूर्व सभा का संचालन कर रहे बनवारीलाल कुल्हरी ने राज्यपाल के नाम उपखण्ड अधिकारी को सौंपे गये ज्ञापन का वाचन किया। रैली एवं सभा में ओमप्रकाश गोदारा, हरि जानूं, प्रहलाद जाखड़, वीरेन्द्र कस्वां, भंवरलाल पाण्डर, शैलेन्द्र लाटा, महेन्द्र डूकिया, जगदीश सेवदा, रूपाराम गुलेरिया, बनवारी गुरू, कानाराम खीचड़, छात्र नेता महेन्द्र गोदारा, नरसाराम जानूं, वीरेन्द्र चौधरी, नानूराम शेरडिय़ा, बाबूलाल तेतरवाल सहित अनेक लोग शामिल थे।

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