बिजली का ट्रांसफार्मर से बच्चों एवं अभिभावकों तथा शिक्षकों में भय का माहौल

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लगातार हो रही बरसात के पानी की निकासी के लिए प्रशासन द्वारा किये जा रहे प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। कस्बे के हरिजन बस्ती मौहल्ले में स्थित दो राजकीय विद्यालयों के बच्चों को स्कूल जाने के लिए बरसाती पानी में लम्बा रास्ता तय करना पड़ता है। दोनो विद्यालयों के करीब साढ़े तीन सौ बच्चों को शिक्षा ग्रहण करने के लिए बरसाती एवं गंदे पानी के अन्दर से आवागमन करना पड़ता है। हरिजन बस्ती स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय नं. 10 के मुख्य प्रवेशद्वार के बाहर लगा बिजली का ट्रांसफार्मर से बच्चों एवं अभिभावकों तथा शिक्षकों में भय का माहौल है।

बरसाती पानी एवं गंदे पानी के भराव में खड़े ट्रांसफार्मर से करंट आकर कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। लेकिन बार-बार लिखित एवं मौखिक सूचना दिये जाने के बाद भी विद्युत विभाग एवं प्रशासन द्वारा बरती जा रही लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। बरसाती पानी में खड़े ट्रांसफार्मर से करंट आने पर इन दो विद्यालयों के अलावा पूरी बस्ती में करंट फैलने की आशंका मौहल्लेवासियों द्वारा व्यक्त की जा रही है। लेकिन विद्युत विभाग एवं प्रशासन कानो में तेल डालकर व रूई दबाकर कुम्भकर्णी नींद सोये हुए है, पता नहीं कब जागेगा? प्रशासन की नींद टूटने में देरी का खामियाजा कहीं स्कूली बच्चों एवं मौहल्लेवासियों को भुगतना पड़ सकता है।

हरिजन बस्ती स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय नं. 10 के प्रधानाध्यापक अल्ताफ अली ने बताया कि बरसाती पानी की निकासी एवं ट्रांसफार्मर से करंट की आशंका को लेकर उपखण्ड अधिकारी को पत्र लिखकर निवेदन किया हुआ है, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। अल्ताफ अली ने विद्यालय की मरम्मत करवाने की आवश्यकता भी बताई। इसी विद्यालय के सामने स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय नं. 8 के प्रधानाध्यापक विजयकुमार टाक ने बताया कि बरसाती पानी की निकासी नहीं होने के कारण बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दोनो ही विद्यालयों में अध्ययनरत हरिजन, रैगर व खटीक समाज के दलित व गरीब बच्चों को बरसाती पानी व ट्रांसफार्मर के करंट के भय के बीच शिक्षा ग्रहण करने के लिए अपने विद्यालय आना पड़ता है।

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