दर्द बांटती है बेटियां – डा. अजय चौधरी

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आमिर खान के सत्यमेव जयते कार्यक्रम फेम और कन्या भु्रण हत्या पर स्टिंग ऑपरेशन करने वाली युवा पत्रकार डा. मीना शर्मा ने कहा कि बेटी सुरक्षित है तो हमारा कल संरक्षित है। उदीयमान अन्तराष्ट्रीय संस्था डेस्टीनेशन होप द्वारा आयोज्य कार्यक्रम में डा. मीना शर्मा ने कहा कि बेटियों के सम्बन्ध में हमारी परम्परावादी घृणित मानसिकता को बदलने से ही समाज का भला हो पाना सम्भव है, जब तक लड़के-लड़कियों का भेद समाज से नहीं मिटेगा, तब तक समाज का विकास सम्भव नहीं है। डा. मीना शर्मा ने अपने कन्या भु्रण हत्या पर किये गये स्टिंग ऑपरेशन के अनुभव बताते हुए उपस्थितजनों को रोमांचित और भावुक कर दिया। चूरू के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा. अजय चौधरी ने विश्वकर्मा भवन में रविवार शाम आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि बेटियां दर्द बांटती है और बेटे जमीन बांटते हैं। देश में घटते लिंगानुपात को उन्होने एक बड़ी राष्टीय चुनौती बताया। आयोजन की विशिष्ट अतिथि प्राचार्या सन्तोष व्यास ने महिला शिक्षा के सम्बन्ध में, प्रगति प्रसार अधिकारी विद्याद्यर पारीक ने ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के सम्बन्ध में अपनी बात कही।

स्वामी कानपुरी महाराज के सानिध्य में आयोजित उक्त कार्यक्रम में पूर्व मंत्री खेमाराम मेघवाल व गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति के अध्यक्ष करणीदान मंत्री ने भी अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम के प्रारम्भ में डेस्टीनेशन होप के अध्यक्ष दिवांशु जांगीड़ ने आयोजकीय पृष्ठभुमि पर प्रकाश डाला। आयोजन में रक्तदाताओं का सम्मान भी किया गया। संस्था की ओर से लगाये गये शिविर में 62 जनों ने रक्तदान किया। रक्तदान शिविर का उद्घाटन करते हुए कानपुरी जी महाराज ने कहा कि शुद्ध खान-पान व शुद्ध विचार से ही जीवन का विकास सम्भव है। उन्होने कहा कि जीवन ईश्वर द्वारा प्रदत अनमोल निधि है, हमें इसका मोल समझना चाहिये और जीवन को सर्वश्रेष्ठ बनाने के लिए प्रयास करना चाहिये। कार्यक्रम में जांगीड़ समाज के मंत्री बाबूलाल जांगीड़, बीआरजीबी बैंक के प्रबन्धक जनार्दन जांगीड़, निगम जांगीड़, यंग्स क्लब के गिरधर शर्मा, हाजी शम्सूद्दीन शर्मा, बी. जी. शर्मा आदि उपस्थित थे। आयोजकीय संस्था के दिवांशु जांगीड़, हेमेन्द्र विश्नोई, अविनाश जांगीड़, सुनील प्रजापत, आसिफ रंगरेज, राकेश शर्मा, मनोज दाधीच, मुरलीमनोहर शर्मा, हिमांशु जांगीड़, राकेश जांगीड़, पंकज जांगीड़ ने अपना योगदान दिया। संचालन घनश्यामनाथ कच्छावा ने किया।

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