जामिया हाशमिया अहले सुन्नत का 12 वां वार्षिकोत्सव सम्पन्न

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कस्बे के इस्लामिक शिक्षा केन्द्र जामिया हाशमिया अहले सुन्नत का 12 वां वार्षिकोत्सव मुफ्ति – ए – राजस्थान अशफाक हुसैन नईमी के सानिध्य एवं पीरे तरीकत सैयद जहूर अली अशरफी की अध्यक्षता में सोमवार रात्री को सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मो. रजा रहमानी (बिहार), सैयद महमूद जमां (सुजानगढ़), अख्तर परवाज (बिहार), मोहतसिम रजा (बिहार), अमीर हुसैन (बिहार) तथा हबीबुर्रहमान (प. बंगाल) को आलमियत, कुरान कंठस्थ करने पर बिहार के गुलाम समदानी, सज्जाद आलम व महबूब आलम को हाफिज एवं शेरानी आबाद के मो. शरीफ, फिरोज खान व सुजानगढ़ के मो. आसीफ को कारी की सनद डिग्री प्रदान की गई।

मुफ्ति – ए- राजस्थान अल्लामा अशफाक हुसैन नईमी, मुफ्ति वली मोहम्मद, माहे तैबा के सम्पादक फैयाब अहमद, मौलाना मो. सईद अबूबकर, अयूब बाड़मेरी, हाफिज अल्लाह बख्श ने सनद पाने वाले बच्चों की दस्तारबंदी कर उनका इस्तकबाल किया एवं दुआ-ए-खैर की। इससे पूर्व कारी इमरान जयपुरी, मो. मुस्तफा रजा, गुलाम समदानी, मौलाना अमीर हुसैन व सैयद मुशाहिद ने हम्दोसना व नाते मुबारका की एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दी। मदरसे के व्यवस्थापक सैयद जहूर अली ने प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि संस्था से अब तक 106 उलमा – ए- किराम फरागत हासिल कर चूके हैं।

लखनऊ के कलीम अशरफ नौमानी ने अहले बैत की मुहब्बत व इल्मेगैब विषय पर अनेक हदीसें पेश करते हुए हुए कहा कि अहले बैत की मुहब्बत इस्लाम की बुनियाद है। सैयद अशरफ कलीम जिलानी ने परदये तिरगी उठाकर चेहरा ए कायनात से, दीदा ए दिल चमक उठे उनकी तजल्लीयात से ……….. के माध्यम से नबी ए करीम की सूरत व सीरत पर प्रकाश डाला। देर रात तक चले अजीमुश्शान कार्यक्रम में राजस्थान, बिहार, पश्चिम बंगाल व उतरप्रदेश के सैंकड़ो उलेमाओं के साथ अंचल के हजारों अकीदतमंद मुसलमान शरीक हुए।

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