अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है गांधी आश्रम

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महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपने को साकार करने के उद्देश्य से स्वतंत्रता सेनानी स्व. बनवारीलाल बेदी बेदी की गहन तपस्या एवं राष्ट्रपिता के नाम से रचनात्मक कार्य करने की इच्छा को देखते हुए सुजानगढ़ के सेठ साहकारों ने छापर रोड़ पर दिलवाई गई जमीन पर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री हीरालाल शास्त्री ने गांधी आश्रम नामक संस्था का बीजारोपण किया। जिसे एक स्कूल के रूप में संचालित एवं सींचित करते हुए स्व. बेदी ने एक वट वृक्ष बना दिया।

जिसकी छांव में आस-पास के आबसर, बोबासर, साण्डवा, कातर, बीदासर, भालेरी, सेहला, सातड़ा, श्री डूंगरगढ़, चूरू, बीकानेर एवं आस-पास के अनेक गांवों – कस्बों में कताई – बुनाई विक्रय आदि के केन्द्र स्थापित एवं संचालित किये गये, जिनके माध्यम से लाखों रूपये के ऊनी कच्चे माल के वस्त्रादि तैयार किये जाकर उनका विक्रय किया जाता था। महात्मा गांधी के सिद्धान्तो के अनुसार संचालित होने वाली इस संस्था से आस-पास के हजारों लोगों को रोजगार भी मिलता था। तत्कालीन मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाडिय़ा एवं हरिदेव जोशी के आर्शीवाद से पल्लवित एवं पुष्पित इस संस्था का समय-समय पर जयप्रकाश नारायण, संत विनोबा भावे, गोकुल भाई भट्ट जैसी महान विभुतियों ने पदार्पण कर संस्था का गौरव बढ़ाया। राजस्थान ही अपितु उतरप्रदेश व मध्यप्रदेश सहित उतर भारत में अपने नाम का डंका बजाने वाली इस संस्था की गतिविधियों में 12 अक्टूबर 1972 को बनवारीलाल बेदी के निधन के बाद निरन्तर गिरवाट आनी शुरू हो गई और आज स्थिति ये है कि ये संस्था अपना वजूद बचाये रखने के लिए संघर्ष कर रही है।

स्व. बेदी द्वारा पल्लवित एवं पुष्पित वट वृक्ष आज ना तो छायादार है और ना ही अपनी विशालता को लिये हुए है। इस वट वृक्ष की कृषकाय काया का अपनी जड़ों पर से ही भरोसा उठने लगा है। चंद स्वार्थी लोगों द्वारा इस संस्था के अधीन भवनों को खुर्द-बुर्द कर इसका नामोनिशान मिटाने का प्रयास किया जा रहा है। कस्बे के राजेन्द्र बेदी ने मुख्यमंत्री को पत्र प्रेषित कर इस संस्था के समस्त रिकार्ड की जांच करवाने तथा संस्था की सम्पतियों एवं परिसम्पतियों एवं दायित्वों का पूर्ण खुलासा करने की मांग करते हुए इसे पुन: संचालित करने की अनुरोध किया है। इस संस्था के पुन: शुरू होने से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आदर्शों को बल मिलेगा तथा अनेक बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिलेगा। बेदी ने अपने पत्र में संस्था के घोटालों की निष्पक्ष जांच करवाने की मांग करते हुए संस्था के पुन: संचालन के लिए सकारात्मक एवं रचनात्मक सहयोग देने का निवेदन किया है।

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