चमेलीदेवी अग्रवाल सेवा सदन का लोकार्पण शनिवार को

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सालासर धाम में जिला जिन्द सालासर धर्मार्थ ट्रस्ट सालासर के सौजन्य से नवनिर्मित चमेलीदेवी अग्रवाल सेवा सदन का लोकार्पण शनिवार को जूनापीठाधीश्वर महामण्डलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरीजी महाराज, अग्रवाल ग्रुप के चैयरमैन विनोद अग्रवाल, उनकी धर्मपत्नी नीना अग्रवाल, पुरूषोत्तम अग्रवाल, संजय अग्रवाल, देवराज अग्रवाल के अतिथ्य में हुआ। लोकार्पण समारोह के मुख्य अतिथि स्वामी अवधेशान्द जी महाराज ने कहा कि जीवन में कुछ पल प्रेरक ही नहीं प्रासंगिक भी होते हैं, जो परमार्थिक बन जाते हैं।

महाराज ने कहा कि तीर्थ में जाकर सत्कर्म करने चाहिए। सत्कर्मों द्वारा किये गये कार्य का प्रतिफल पुरूषार्थ व कल्याण के लिए किए गए कार्य है। उन्होने कहा कि अगर किसी का कोई गुरू नहीं है तो हनुमानजी महाराज को अपना गुरू मान लेना चाहिए। ज्ञान को सबसे बड़ा फल बताते हुए महाराज ने कहा कि ज्ञान के जीवन में आने से वेदना नहीं रहती है। जीवन को आम का पर्याय बताते हुए स्वामी जी ने कहा कि छिलके और गुठली के बिना आम की परिकल्पना नहीं की जा सकती है। क्योंकि गुठली से आम में रस बनता है और छिलका उस रस की रक्षा करता है।

रस निकालने के बाद छिलके और गुठली को फेंक दिया जाता है, उसी प्रकार जीवन रूपी आम में छिलका व गुठली रूपी अवशेषों को रस निकालने के बाद फेंक देना चाहिए। महाराज ने कहा कि ज्ञान प्राप्त होने पर विचार जाग्रत होंगे और विचार से विवेक आयेगा। महाराज ने कहा कि अपना संस्मरण सुनाते हुए कहा कि आज तक मुझे किसी को कथा करवाने के लिए कहने की आवश्यकता नहीं पड़ी। भक्तजन कतार लगाये खड़े कथा करवाने के लिए तैयार रहते हैं। लेकिन जब मैं सालासर आया तब मुझे ऐसा लगा कि हनुमान जी महाराज यहीं विराजमान है और हनुमान जी की आज्ञा से तथा पुजारी परिवार के निवेदन पर मैने विनोद अग्रवाल से सालासर में रामकथा करवाने का आग्रह किया।

उन्होने कहा कि कभी -कभी सन्यासी को भी याचना करनी चाहिए। सन्यासी को याचना करने में संकोच नहीं करना चाहिए। महाराज ने कहा कि सन्यासी को अपनी प्राण रक्षा के लिए अन्न की तथा अधिक आवश्यकता होने पर लोक हित के लिए मांगना चाहिए। महाराज ने अजन्ता – एलोरा की गुफाओं का उदहरण देते हुए कहा कि इन गुफाओं को पहाड़ का सीना चीर कर तीन पीढिय़ों ने बनाया तथा भिती चित्रों को इनकी दीवारों पर उके रा। अगर पुर्वज अपनी भावी पीढ़ी को पहाड़ चीरने व चित्र उकेरने की कला नहीं सीखाकर जाते तो करीब डेढ़ सौ साल तक चले इस कार्य में एकरूपता नहीं आ सकती थी। इसलिए अपने जीवन में ही अपनी भावी पीढ़ी को अपने काम के प्रति समर्पित एवं प्रशिक्षित करें। महाराज ने कबीर जी के इस दोहे के द्वारा फल के बारे में बताया तीर्थ जाये एक फल, संत मिले फल चार , सदगुरू मिले फल अनेक ,कहत कबीर विचार ।

इस अवसर पर अग्रवाल ग्रुप इन्दौर के चैयरमेन पुरूषोतम अग्रवाल तथा रोटोमेक ग्रुप कानपुर के चैयरमेन विक्रम कोठारी, नखराली ढ़ाणी इन्दौर के एम.डी. संजय अग्रवाल, मेघालय रोड़ कैरियर प्रा. लि. कोलकाता के एम. डी. अशोक अग्रवाल तथ टी.आर.वी. शूज दिल्ली के चैयरमेन त्रिलोकीनाथ गोयल, दीपचंद गोयल, मिठ्ठनलाल पुजारी, मांगीलाल पुजारी, श्रीराम पुजारी, विश्वनाथ पुजारी काबर मंचस्थ थे। समारोह की अध्यक्षता अग्रवाल कोल कॉर्पोरेशन प्रा. लि., इन्दौर के एम.डी. विनोद अग्रवाल ने की।

अतिथियों का स्वागत सुरेश जिन्दल, शशिपाल मंगल, रोशनलाल जैन, अरूण जैन, रामभज गोपाल, राजकुमार मितल, विजय कान्होरिया, अश्विनी गुप्ता, संजय गोयल, जयप्रकाश करनाल ने स्वागत किया। कार्यक्रम के स्वागताध्यक्ष जिला जीन्द सालासर धर्मार्थ ट्रस्ट के प्रधान रामप्रकाश काहनोरिया थे। आयोजको द्वारा सालासर बालाजी मंदिर के पुजारियों, श्रीराम कथा के व्यवस्था करने वाले सुशील बेरीवाल, के. सी. गुप्ता सहित अनेक ट्रस्टियों का स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया।

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