सालासर ग्राम में श्रीमद् भागवत कथा

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नकटवर्ती सालासर ग्राम में लक्ष्मीनारायण पुजारी के आवास मोहनधाम में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन व्यासपीठ पर विराजमान साध्वी प्राचीदेवी ने उपस्थितजनों को कथा का अमृतपान करवाते हुए कहा की मानव जीवन में ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करना आवश्यक है। भगवान के अब तक हुए 23 अवतारों में सभी की अलग-अलग महिमा है अवतार शब्द की व्याख्या करते हुए साध्वी ने कहा की इस शब्द का प्राकट्य अवतरीण शब्द से हुआ है, जिसके दो अर्थ है- पहला सीढिय़ां और दूसरा नीचे उतरना।

प्राची देवी ने कहा की जब सर्वोच्च सत्ता अपने भक्तों के कल्याण के लिए इस धरा पर आती है, उसे अवतार कहते हैं। जितने भी अवतार हुए है उनके मूल में गुढ़ रहस्य छिपा हुआ है। साध्वी जी ने अलग-अलग स्थानों पर भागवत कथा के वाचन एवं श्रवण की महिमा बताते हुए कहा की सालासर की भुमि अपने-आप में तीर्थराज प्रयाग है। जहां आकर भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

इससे पूर्व मंगलवार को कथा के प्रथम दिवस पर बालाजी मन्दिर से कलश यात्रा निकाली गई, जो गांव के प्रमुख मार्गोँ से होते हुए कथा स्थल पर पंहूची। कथा के प्रथम दिन उपस्थितजनों को भागवत का महात्म्य बताते हुए कथा मर्मज्ञ प्राचीदेवी ने भक्ति, ज्ञान, वैराग्य के प्रसंग का श्रवण करवाते हुए कहा की भक्ति मनुष्य जीवन में परम आवश्यक है। भक्ति की प्रधानता पर बल देते हुए साध्वी ने कहा की भक्ति रूपी तत्व के जीवन में आने पर व्यक्ति का आत्मबल बढऩे लगता है तथा प्रभु की कृपा होती है।

इसलिए भक्ति करनी चाहिए। हरियाणा के श्रीमहन्त शिवानन्द सरस्वती महाराज,  महन्त मोहन भारती महाराज के सानिध्य में आयोजित इस कथा के  आरम्भ से पूर्व महावीर प्रसाद पुजारी, कथा यजमान बसन्तीलाल पुजारी, रामबिहारी पुजारी, देवकीनन्दन पुजारी, रविशंकर पुजारी, श्यामसुन्दर सैन, रामजीलाल शर्मा, जर्नादन शर्मा, गौरव बंसल आदि साध्वी जी का स्वागत किया।

आंजनेय योग सन्यास आश्रम धर्मार्थ ट्रस्ट के तत्वाधान में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा को सफल बनाने के लिए महावीरप्रसाद पुजारी, देवकिनन्दन पुजारी, हनुमान सेवा समिति अध्यक्ष सांवरमल पुजारी, सम्पत पुजारी, धनराज पुजारी, सुरजाराम ढ़ाका, भंवरलाल पुजारी, विजयकुमार पुजारी, परसराम पुजारी, कन्हैयालाल देरासरी, छगनलाल चोबीवाल, मनोजकुमार मिश्रा, भगवानाराम ढ़ाका, बैगाराम ढ़ाका, गोपीराम प्रजापत, मांगीलाल प्रजापत, ईश्वरराम प्रजापत, केशरदेव प्रजापत, इन्द्रसिंह शेखावत, नारायणसिंह शेखावत, सरपंच दामोदर मेघवाल, उपसरपंच हीरालाल पुजारी, कैलाश पौद्दार, सांवरमल सैन आदि जुटे हुए है। कथा में महेन्द्रसिंह शेखावत, भंवरसिंह, प्रभुसिंह, दिलीपसिंह, उम्मेदसिंह, गौरव बंसल, इन्द्रचन्द पौद्दार, श्यामसुन्दर सैन विशेष सहयोग दे रहे हैं।

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